Hartalika Teej 2026 : तीज पर क्यों खास होता है मायके से आया बायना’ जानें साड़ी-सिंदूर का महत्व

Hartalika Teej 2026 : नई दिल्ली। हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना से इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। तीज के अवसर पर मायके से बेटी के लिए साड़ी, सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री भेजने की परंपरा कई परिवारों में आज भी निभाई जाती है। इसे ही कई जगहों पर ‘बायना’ कहा जाता है।

क्या होता है तीज का बायना?

बायना दरअसल बेटी या बहू के लिए मायके की ओर से भेजा जाने वाला पारंपरिक उपहार होता है। इसमें साड़ी, सुहाग का सामान, मिठाई, फल, मेवे और घर-परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य वस्तुएं शामिल की जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में बायना देने का तरीका अलग हो सकता है। इसका उद्देश्य केवल उपहार देना नहीं, बल्कि बेटी के प्रति मायके के स्नेह और आशीर्वाद को व्यक्त करना माना जाता है।

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मायके से आई साड़ी क्यों होती है खास?

तीज पर मायके से आई साड़ी को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि बेटी के मायके से भेजे गए वस्त्र उसके लिए प्रेम, सम्मान और शुभकामनाओं का प्रतीक होते हैं। कई महिलाएं तीज पूजा और व्रत के दौरान मायके से आई साड़ी पहनती हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार नई साड़ी का रंग और प्रकार भी अलग-अलग हो सकता है।

सिंदूर और सुहाग सामग्री का महत्व

बायने में सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, काजल, कंघी, महावर और अन्य सुहाग सामग्री भी रखी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें सुहाग और दांपत्य जीवन की शुभता से जोड़ा जाता है। तीज पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं तथा अपने पति की दीर्घायु और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

माता-पिता के आशीर्वाद का प्रतीक

बायने की परंपरा का सबसे भावनात्मक पक्ष बेटी और मायके के रिश्ते से जुड़ा है। विवाह के बाद भी मायके की ओर से तीज पर बेटी के लिए सामान भेजना यह संदेश देता है कि उसके सुख-दुख में परिवार हमेशा उसके साथ है। कई जगह माता-पिता बेटी के साथ उसके ससुराल वालों के लिए भी मिठाई और अन्य उपहार भेजते हैं।