Varaha Jayanti 2026 : वराह जयंती आज’ भगवान विष्णु ने क्यों लिया था वराह अवतार’ जानें हिरण्याक्ष वध की पूरी कथा

Varaha Jayanti 2026 : नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु के तीसरे अवतार माने जाने वाले वराह रूप को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी अवतार में भगवान विष्णु ने दैत्य हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को उसके संकट से मुक्त कराया था। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

क्यों लिया भगवान विष्णु ने वराह अवतार?

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय दैत्यराज हिरण्याक्ष ने अपनी शक्ति के बल पर तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था। उसने पृथ्वी को समुद्र के गहरे जल में ले जाकर छिपा दिया। पृथ्वी के जल में समा जाने से सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा और देवताओं सहित सभी चिंतित हो गए।

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तब भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा के लिए वराह यानी जंगली सूअर का रूप धारण किया। मान्यता है कि भगवान वराह ने समुद्र में प्रवेश कर अपने विशाल दांतों पर पृथ्वी को उठाया और उसे फिर से उसके स्थान पर स्थापित किया।

हिरण्याक्ष और भगवान वराह के बीच हुआ युद्ध

पृथ्वी को जल से बाहर निकालते समय हिरण्याक्ष ने भगवान वराह को युद्ध के लिए चुनौती दी। इसके बाद दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। लंबे संघर्ष के बाद भगवान विष्णु ने वराह रूप में हिरण्याक्ष का वध कर दिया।

धार्मिक ग्रंथों में इस प्रसंग को अधर्म पर धर्म और अहंकार पर सत्य की विजय का प्रतीक माना गया है। भगवान वराह द्वारा पृथ्वी की रक्षा करने की कथा प्रकृति और सृष्टि के संरक्षण का संदेश भी देती है।

वराह जयंती पर कैसे होती है पूजा?

इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु और उनके वराह स्वरूप की पूजा करते हैं। घर के मंदिर में भगवान की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर पंचामृत से स्नान, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। भक्त विष्णु मंत्रों का जाप और भगवान वराह की कथा का श्रवण करते हैं।